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Rudrashtakam Shlok 4 Meaning | चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं Explained #viral #shiv #shorts

रुद्राष्टकम के चौथे श्लोक का सरल अर्थ जानिए जिसमें भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन है — नीलकंठ, दयालु, प्रसन्न और सबके स्वामी। आसान व्याख्या और वीडियो विजुअल्स के साथ।

Discover the beautiful meaning of Rudrashtakam Shlok 4 describing the divine appearance of Lord Shiva – Neelkanth, compassionate, smiling and protector of all. Easy Hindi explanation with visuals for spiritual learning and daily chanting.

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1️⃣ चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं

अर्थ:
शिव के कानों में झूलते हुए कुंडल हैं,
उनकी भौंहें और तीनों नेत्र बहुत विशाल और सुंदर हैं।

👉 मतलब: शिव का दिव्य और आकर्षक स्वरूप।

2️⃣ प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्

अर्थ:
उनका चेहरा हमेशा प्रसन्न रहता है,
उनका कंठ नीला है (विष पीने के कारण),
और वे बहुत दयालु हैं।

👉 शिव ने दुनिया बचाने के लिए विष पिया।

3️⃣ मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं

अर्थ:
वे शेर की खाल पहनते हैं,
और गले में मुंडों की माला धारण करते हैं।

👉 शिव = भय और मृत्यु पर विजय।

4️⃣ प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

अर्थ:
मैं उस प्रिय शंकर की भक्ति करता हूँ
जो सबके स्वामी हैं।

🌸 आसान भावार्थ

मैं उस प्रसन्न, दयालु, नीलकंठ शिव की भक्ति करता हूँ
जो सबके भगवान हैं और सबकी रक्षा करते हैं।

Видео Rudrashtakam Shlok 4 Meaning | चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं Explained #viral #shiv #shorts канала नव धर्म दर्पण (Nav Dharma Darpan)
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