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रामचरितमानस दोहा 3 (क) - संतों का समान प्रेम | बंदउँ संत समान चित… दोहा अर्थ | Ramcharitmanas Shorts

दोहा 3 (क) - “बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ।
अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ।।’’

इस दोहे में तुलसीदास जी बताते हैं कि संत सबके प्रति समान प्रेम रखते हैं—वे किसी में भेदभाव नहीं करते।
जैसे एक फूल की सुगंध दोनों हाथों को समान रूप से महकाती है,
वैसे ही संत जन सब पर समान कृपा और दया बरसाते हैं।

👉 इस वीडियो में सुनिए इस सुंदर दोहे का आसान अर्थ।

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Видео रामचरितमानस दोहा 3 (क) - संतों का समान प्रेम | बंदउँ संत समान चित… दोहा अर्थ | Ramcharitmanas Shorts канала नव धर्म दर्पण (Nav Dharma Darpan)
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