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Supreme Court judgment on Maternity leave for lady #civilcourts #yt #fyp #supremecourt #judgment

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि बच्चा गोद लेने वाली महिला कर्मचारी, चाहे बच्चा किसी भी उम्र का हो, 12 हफ्तों की वैतनिक (Paid) मैटरनिटी लीव की हकदार है। कोर्ट ने 3 महीने से छोटे बच्चे की शर्त को असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया है, क्योंकि यह समानता के अधिकार का उल्लंघन था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु: ऐतिहासिक फैसला: जस्टिस जेबी परदीवाला और आर. महादेवन की पीठ ने हम्सानन्दिनी नंदूरी बनाम मामले में यह फैसला सुनाया, जिसमें 3 महीने की उम्र की सीमा को खत्म कर दिया गया। समान अधिकार: कोर्ट ने माना कि गोद लेने वाली मां को भी जैविक मां (Biological Mother) के समान ही मातृत्व लाभ पाने का अधिकार है। भावनात्मक जुड़ाव (Bonding): कोर्ट का कहना है कि मातृत्व केवल जन्म से नहीं, बल्कि देखभाल और जिम्मेदारी से जुड़ा है, इसलिए गोद लेने वाली मां को बच्चे के साथ घुलने-मिलने के लिए समय मिलना चाहिए। भेदभावपूर्ण नियम रद्द: पहले नियम था कि सिर्फ 3 महीने से कम के बच्चे को गोद लेने पर ही छुट्टी मिलती थी। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन माना। पितृत्व अवकाश (Paternity Leave): कोर्ट ने केंद्र सरकार को पिता के लिए भी पितृत्व अवकाश पर नीति बनाने का सुझाव दिया है। यह फैसला गोद लेने वाली कामकाजी महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है और गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक समर्थनपूर्ण बनाता है। #yt #fyp #viral #shorts #ytshorts

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