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गांधी | अगस्त 1942 में मुंबई में 'भारत छोड़ो' का ऐलान | करो या मरो का नारा | कुमार प्रशान्त #पार्ट36
कुमार प्रशांत जी का अगला वीडियो 15 अगस्त 2025 को दिन में 11:45 पर देखें ।
इस वीडियो में कुमार प्रशान्त द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1942 में मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में हुई ऐतिहासिक सभा में महात्मा गांधी के भाषण का उल्लेख करते हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के विचार के विपरीत बापू ने यह स्पष्ट रूप से कहा था कि वह भारत की आजादी के लिए लड़ाई करने का सबसे अच्छा अवसर था। यदि अंग्रेज सरकार वास्तव में फासिस्ट हिटलर के खिलाफ लड़ रही थी तो उसे गुलाम भारतीयों के बजाय आजाद भारत वासियों का समर्थन अधिक हितकर होगा उन्होंने नवयुवक समाजवादी नेता युसूफ मेहर अली द्वारा सुझाए गए 'भारत छोड़ो' के नारे को स्वीकार किया साथ में उन्होंने कहा कि 'करो या मरो'। यह भी जोड़ दिया कि यह लड़ाई अहिंसा के साथ लड़ी जाने वाली है। उनका सुझाव था कि उनके पीछे चलने वाले सब अपने अपनी बांहों में एक सफेद फीता बांध लें जिससे कि यदि इस आंदोलन में उनकी मौत हो जाए तो भी गांधी जी के अनुयाई के रूप में उनकी गिनती की जा सके। बहुत ही स्पष्ट और प्रभावकारी रूप में कुमार प्रशान्त के इस वीडियो को देखें
कुमार प्रशांत जी का परिचय उन्हीं के शब्दों में।
प्रख्यात शायर दुष्यंत कुमार ने अपनी गजलों के बारे में कहा है : “ मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता
हूं / वह गजल आपको सुनाता हूं”।
इसी तर्ज पर कुमार प्रशांत जी महात्मा गांधी के विचारों को ओढ़ते-बिछाते हैं।.
उनके लिए इतिहास एक जिंदा नदी की तरह है जो भूत से चल कर, वर्तमान को छूती हुई
भविष्य की तरफ बहती चली जाती है। उस इतिहास के एक मोड़ पर, इतिहास को नई
दिशा में मोड़ते हुए उन्हें महात्मा गांधी मिलते हैं जिनके साथ कुमार प्रशांत का सफर
चलता है।
वे गांधी-विचार व इतिहास के गहरे अध्येता ही नहीं, इसके व्यापक प्रयोग के सिपाही भी
हैं वे कवि भी हैं, लेखन भी, वक्ता भी और व्याख्याता भी।
#KumarPrashant #GandhiSmritinDarshanSamiti #NationalGandhiMuseum
#GandhiResearchFoundation #GRInstituteofNonViolence #CentreForGandhianStudies
#DeptofGandhianStudies #SampurnKrantiVidyalaya #DeptofGandhianThoughtnPeace #rabindranathtagore
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Видео गांधी | अगस्त 1942 में मुंबई में 'भारत छोड़ो' का ऐलान | करो या मरो का नारा | कुमार प्रशान्त #पार्ट36 канала Lex Consilium Foundation
इस वीडियो में कुमार प्रशान्त द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान 1942 में मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में हुई ऐतिहासिक सभा में महात्मा गांधी के भाषण का उल्लेख करते हैं। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के विचार के विपरीत बापू ने यह स्पष्ट रूप से कहा था कि वह भारत की आजादी के लिए लड़ाई करने का सबसे अच्छा अवसर था। यदि अंग्रेज सरकार वास्तव में फासिस्ट हिटलर के खिलाफ लड़ रही थी तो उसे गुलाम भारतीयों के बजाय आजाद भारत वासियों का समर्थन अधिक हितकर होगा उन्होंने नवयुवक समाजवादी नेता युसूफ मेहर अली द्वारा सुझाए गए 'भारत छोड़ो' के नारे को स्वीकार किया साथ में उन्होंने कहा कि 'करो या मरो'। यह भी जोड़ दिया कि यह लड़ाई अहिंसा के साथ लड़ी जाने वाली है। उनका सुझाव था कि उनके पीछे चलने वाले सब अपने अपनी बांहों में एक सफेद फीता बांध लें जिससे कि यदि इस आंदोलन में उनकी मौत हो जाए तो भी गांधी जी के अनुयाई के रूप में उनकी गिनती की जा सके। बहुत ही स्पष्ट और प्रभावकारी रूप में कुमार प्रशान्त के इस वीडियो को देखें
कुमार प्रशांत जी का परिचय उन्हीं के शब्दों में।
प्रख्यात शायर दुष्यंत कुमार ने अपनी गजलों के बारे में कहा है : “ मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता
हूं / वह गजल आपको सुनाता हूं”।
इसी तर्ज पर कुमार प्रशांत जी महात्मा गांधी के विचारों को ओढ़ते-बिछाते हैं।.
उनके लिए इतिहास एक जिंदा नदी की तरह है जो भूत से चल कर, वर्तमान को छूती हुई
भविष्य की तरफ बहती चली जाती है। उस इतिहास के एक मोड़ पर, इतिहास को नई
दिशा में मोड़ते हुए उन्हें महात्मा गांधी मिलते हैं जिनके साथ कुमार प्रशांत का सफर
चलता है।
वे गांधी-विचार व इतिहास के गहरे अध्येता ही नहीं, इसके व्यापक प्रयोग के सिपाही भी
हैं वे कवि भी हैं, लेखन भी, वक्ता भी और व्याख्याता भी।
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Информация о видео
12 августа 2025 г. 11:15:06
00:08:46
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