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स्मार्ट मीटर ने बर्बाद की लोगों की जिंदगी #smartmeter #smartmetering #smartmeterprotest #smartmeters
स्मार्ट मीटर ने बर्बाद की लोगों की जिंदगी
#smartmeter #smartmetering #smartmeterprotest #smartmeters
स्मार्ट मीटर को लेकर भारत के कई राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र) में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उपभोक्ता और सामाजिक संगठन इसके खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं।
इस विरोध और "बिल ज्यादा आने" के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं।
बिल ज्यादा आने के तकनीकी और व्यावहारिक कारण
कई लोगों को लगता है कि मीटर तेज चल रहा है, लेकिन इसके पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं।
(1.) सटीकता (High Accuracy): पुराने मैकेनिकल या
डिजिटल मीटर समय के साथ सुस्त हो जाते थे और कम बिजली रिकॉर्ड करते थे। स्मार्ट मीटर बहुत संवेदनशील होते हैं; ये घर के छोटे-छोटे उपकरणों (जैसे स्टैंडबाय मोड पर टीवी, एलईडी बल्ब या चार्जर) द्वारा ली गई बहुत कम बिजली को भी सटीक रूप से मापते हैं।
(2.) लीकेज और अर्थिंग की समस्याः अगर घर की वायरिंग पुरानी है या कहीं करंट लीक हो रहा है, तो पुराने मीटर इसे नहीं पकड़ पाते थे। स्मार्ट मीटर इस 'वेस्ट' बिजली को भी गिनता है, जिससे बिल बढ़ जाता है।
(3.) फिक्स्ड चार्ज और एरियरः कई बार पुराने बिलों का बकाया (Arrears) या सुरक्षा जमा (Security Deposit) को स्मार्ट मीटर के नए सिस्टम में जोड़ दिया जाता है, जिससे शुरुआती बिल बहुत ज्यादा दिखता है।
(4.) नेटवर्क की समस्याः यदि स्मार्ट मीटर सर्वर से कनेक्ट नहीं हो पाता, तो कभी-कभी बिल का अनुमान (Estimation) गलत लग जाता है, जिसे बाद में सुधारा तो जाता है लेकिन तब तक उपभोक्ता को झटका लग चुका होता है।
लोग विरोध क्यों कर रहे हैं?
प्रोटेस्ट के पीछे केवल बिल की राशि ही नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियां भी हैं।
प्रीपेड सिस्टम का डरः सरकार अब स्मार्ट मीटर को 'प्रीपेड' (मोबाइल रिचार्ज की तरह) कर रही है। लोगों को डर है कि बैलेंस खत्म होते ही रात में या किसी आपात स्थिति में अचानक बिजली कट जाएगी।
सॉफ्टवेयर और सर्वर एररः कई मामलों में देखा गया है कि रिचार्ज करने के बावजूद घंटों तक बिजली वापस नहीं आती या बैलेंस होने पर भी बिजली कट जाती है।
पारदर्शिता की कमीः उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि पैसे कब और क्यों कट गए। ऐप पर डेटा अपडेट होने में देरी होती है, जिससे अविश्वास पैदा होता है।
जबरन इंस्टॉलेशन: कई जगहों पर बिना उपभोक्ता की सहमति या पुरानी समस्याओं को सुलझाए बिना मीटर बदले जा रहे हैं, जिससे नाराजगी है।
Видео स्मार्ट मीटर ने बर्बाद की लोगों की जिंदगी #smartmeter #smartmetering #smartmeterprotest #smartmeters канала RealVikramFact
#smartmeter #smartmetering #smartmeterprotest #smartmeters
स्मार्ट मीटर को लेकर भारत के कई राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र) में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उपभोक्ता और सामाजिक संगठन इसके खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं।
इस विरोध और "बिल ज्यादा आने" के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं।
बिल ज्यादा आने के तकनीकी और व्यावहारिक कारण
कई लोगों को लगता है कि मीटर तेज चल रहा है, लेकिन इसके पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं।
(1.) सटीकता (High Accuracy): पुराने मैकेनिकल या
डिजिटल मीटर समय के साथ सुस्त हो जाते थे और कम बिजली रिकॉर्ड करते थे। स्मार्ट मीटर बहुत संवेदनशील होते हैं; ये घर के छोटे-छोटे उपकरणों (जैसे स्टैंडबाय मोड पर टीवी, एलईडी बल्ब या चार्जर) द्वारा ली गई बहुत कम बिजली को भी सटीक रूप से मापते हैं।
(2.) लीकेज और अर्थिंग की समस्याः अगर घर की वायरिंग पुरानी है या कहीं करंट लीक हो रहा है, तो पुराने मीटर इसे नहीं पकड़ पाते थे। स्मार्ट मीटर इस 'वेस्ट' बिजली को भी गिनता है, जिससे बिल बढ़ जाता है।
(3.) फिक्स्ड चार्ज और एरियरः कई बार पुराने बिलों का बकाया (Arrears) या सुरक्षा जमा (Security Deposit) को स्मार्ट मीटर के नए सिस्टम में जोड़ दिया जाता है, जिससे शुरुआती बिल बहुत ज्यादा दिखता है।
(4.) नेटवर्क की समस्याः यदि स्मार्ट मीटर सर्वर से कनेक्ट नहीं हो पाता, तो कभी-कभी बिल का अनुमान (Estimation) गलत लग जाता है, जिसे बाद में सुधारा तो जाता है लेकिन तब तक उपभोक्ता को झटका लग चुका होता है।
लोग विरोध क्यों कर रहे हैं?
प्रोटेस्ट के पीछे केवल बिल की राशि ही नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियां भी हैं।
प्रीपेड सिस्टम का डरः सरकार अब स्मार्ट मीटर को 'प्रीपेड' (मोबाइल रिचार्ज की तरह) कर रही है। लोगों को डर है कि बैलेंस खत्म होते ही रात में या किसी आपात स्थिति में अचानक बिजली कट जाएगी।
सॉफ्टवेयर और सर्वर एररः कई मामलों में देखा गया है कि रिचार्ज करने के बावजूद घंटों तक बिजली वापस नहीं आती या बैलेंस होने पर भी बिजली कट जाती है।
पारदर्शिता की कमीः उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि पैसे कब और क्यों कट गए। ऐप पर डेटा अपडेट होने में देरी होती है, जिससे अविश्वास पैदा होता है।
जबरन इंस्टॉलेशन: कई जगहों पर बिना उपभोक्ता की सहमति या पुरानी समस्याओं को सुलझाए बिना मीटर बदले जा रहे हैं, जिससे नाराजगी है।
Видео स्मार्ट मीटर ने बर्बाद की लोगों की जिंदगी #smartmeter #smartmetering #smartmeterprotest #smartmeters канала RealVikramFact
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Информация о видео
24 мая 2026 г. 16:53:28
00:00:37
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