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प्रभु श्री राम और माता सीता का दिव्य मिलन 🙏♥️

मिथिला नगरी में राजा जनक ने माता सीता के स्वयंवर का आयोजन किया। शर्त यह थी कि जो वीर भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। बड़े-बड़े राजा और योद्धा आए, लेकिन कोई भी उस धनुष को हिला तक न सका।

तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम आगे बढ़े। जैसे ही उन्होंने शिव धनुष उठाया, वह उनके हाथों में टूट गया। पूरे सभा मंडप में जय-जयकार गूंज उठी। राजा जनक की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। माता सीता ने मुस्कुराते हुए श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी।

इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर मिथिला पहुँचे। चारों ओर दीप, फूल और मंगल गीतों की सुंदर सजावट थी। वेद मंत्रों के बीच श्रीराम और माता सीता ने सात फेरे लिए और हमेशा के लिए एक-दूसरे के जीवन साथी बन गए।

यह विवाह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम, मर्यादा और आदर्श का मिलन माना जाता है।

Видео प्रभु श्री राम और माता सीता का दिव्य मिलन 🙏♥️ канала Anita Ydv
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