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तंत्र (Tantra) और ज्योतिष (Jyotish) दोनों ही भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण अंग हैं

तंत्र (Tantra) और ज्योतिष (Jyotish) दोनों ही भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण अंग हैं, लेकिन इनके उद्देश्य और कार्यक्षेत्र अलग-अलग हैं। नीचे सरल भाषा में अंतर और संबंध समझिए:

🔱 तंत्र (Tantra)

तंत्र एक आध्यात्मिक साधना पद्धति है, जिसका उद्देश्य शक्ति (ऊर्जा) को जागृत कर आत्मबोध या विशेष सिद्धि प्राप्त करना होता है।

मुख्य विशेषताएँ:

मंत्र, यंत्र और ध्यान का प्रयोग

देवी-देवताओं की उपासना (विशेषकर शक्ति स्वरूप)

कुंडलिनी जागरण

विशेष अनुष्ठान और साधनाएँ

तंत्र का उल्लेख कई ग्रंथों में मिलता है, जैसे:

कुलार्णव तंत्र

रुद्रयामल तंत्र

तंत्र का उद्देश्य केवल चमत्कार या वशीकरण नहीं है, बल्कि आत्मिक उन्नति और चेतना का विस्तार भी है।

🔯 ज्योतिष (Jyotish)

ज्योतिष वेदांगों में से एक है। यह ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर जीवन की घटनाओं, स्वभाव और भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन करता है।

मुख्य भाग:

जन्म कुंडली (Birth Chart)

गोचर (Transit)

दशा प्रणाली

मुहूर्त (शुभ समय चयन)

ज्योतिष का मूल ग्रंथ:

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र

वराहमिहिर द्वारा रचित बृहत् संहिता

🔗 तंत्र और ज्योतिष का संबंध

ज्योतिष बताता है कि जीवन में कौन-सी ग्रह बाधा है।

तंत्र उन बाधाओं को दूर करने के उपाय देता है (मंत्र, यंत्र, पूजा)।

उदाहरण: यदि कुंडली में शनि दोष हो, तो तांत्रिक साधना या विशेष मंत्र जाप किया जाता है।

Видео तंत्र (Tantra) और ज्योतिष (Jyotish) दोनों ही भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण अंग हैं канала Astrologer Chhagan Bhargav Jollji
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