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खुपड़िया 😱 हिला देंगे अखंड भारत के यह रहस्य । अखंड भारत के रहस्य । अखंड भारत कैसा था ? Akhand bharat
खुपड़िया 😱 हिला देंगे अखंड भारत के यह रहस्य । अखंड भारत के रहस्य । अखंड भारत कैसा था ? Akhand bharat
दोस्तों आज में आपको अखंड भारत ऐसे रहस्य बताने वाला जिन्हें आज तक आपने कहीं नहीं सुना होगा । जब आप इन रहस्यों को जानोगे तो सनातनी होने पर आपको गर्व महसूस होगा । अखंड भारत का नक्शा नयी संसद में भी लगा हुआ है । आपकी जानकारी के में थोड़ा सा आपको बता दूं की पहले यह पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी हुयी थी जो जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर से जाने जाते थे । इनमें जंबू द्विप सभी के बीचों बीच स्थित था । मनुष्य के रहने के लिये जंबू द्वीप ही सबसे उत्तम माना जाता था । इसका नाम जम्बू जामुन के वृक्ष के आधार पर हुआ था । इस जम्बु द्वीप को भी नो खंडों में बांटा गया था । इलावृत्त, भद्रास्व, किंपुरुष, भारत, हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरू और हिरण्यमय । इसमें जिस भारत का वर्णन है , वहीं हमारा अखंड भारत है । भारत वर्ष के भी नौ खंड हैं इन्द्रद्वीप, कसेरु, ताम्रपर्ण, गभस्तिमान, नागद्वीप, सौम्य, गन्धर्व और वारुण तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है। अखण्ड भारत में आज के अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका आते है केवल इतना ही नहीं कालान्तर में भारत के साम्राज्य में आज के मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैण्ड, दक्षिण वियतनाम, कम्बोडिया, इण्डोनेशिया , चीन आदि में सम्मिलित थे। बहुत सारे लोगों को अखंड भारत को लेकर एक कन्फ्यूजन है , और वह यह है की जब अखंड भारत बनेगा तो इसके सभी देश एक हो जायेंगें , तो बहुत सारी समस्या उत्पन्न होंगीं । तो उनको में बता दूं की पहले ऐसा नहीं था । अलग अलग महाजनपदों में अलग अलग राजाओं का राज हुआ करता था और सभी अपने राज्य घटाते बढ़ाते रहते थे । लेकिन इन सभी के ऊपर एक राजा हुआ करता था , जिसे चक्रवर्ती राजा कहा जाता था , सभी उसी के अंडर रहकर काम करते थे । यदि अखंड भारत बनता है , तो शायद ऐसा ही होगा । अलग - अलग देशों के प्रधानमंत्री अलग अलग होंगें । लेकिन इस सबके ऊपर एक राजा राज करेगा । सभी उसी के अंडर में काम करेंगें । महाभारत के भीष्म पर्व में वेदव्यास जी ने यह स्लोक
''सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।।- (वेदव्यास, भीष्म पर्व, महाभारत)
लगभग 5000 साल पहले लिखा गया था और इसका अर्थ है की हे कुरुनन्दन! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भांति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखाई देता है। इसके दो अंशों में पिप्पल और दो अंशों में महान शश दिखाई देता है। दो अंशों में पिप्पल का अर्थ पीपल के दो पत्तों और दो अंशों में शश अर्थात खरगोश की आकृति के समान दिखाई देता है। आप कागज पर पीपल के दो पत्तों और दो खरगोश की आकृति बनाइए और फिर उसे उल्टा करके देखिए, आपको धरती का मानचित्र दिखाई देखा। यह श्लोक 5 हजार वर्ष पूर्व लिखा गया था। इसका मतलब लोगों ने चंद्रमा पर जाकर इस धरती को देखा होगा तभी वह बताने में सक्षम हुआ होगा कि ऊपर से समुद्र को छोड़कर धरती कहां-कहां नजर आती है और किस तरह की है । और इसी आधार पर का धरती का नक्शा तैयार किया गया और फिर उस पर अलग अलग द्वीपों का विभाजन किया गया । पहले संपूर्ण हिन्दू धर्म जम्बू द्वीप पर शासन करता था। क्योंकी बाकी के द्वीप रहने लायक नहीं थे । फिर हिन्दुओं का शासन घटकर भारतवर्ष तक सीमित हो गया। फिर कुरुओं और पुरुओं की लड़ाई के बाद आर्यावर्त नामक एक नए क्षेत्र का जन्म हुआ जिसमें आज के हिन्दुस्थान के कुछ हिस्से, संपूर्ण पाकिस्तान और संपूर्ण अफगानिस्तान का क्षेत्र था। लेकिन मध्यकाल में लगातार आक्रमण, धर्मांतरण और युद्ध के चलते अब घटते-घटते सिर्फ हिन्दुस्तान बचा है। और कुछ लोग चाहते हैं की इसके भी टुकड़े हो जायें । ऐसे लोगों के बारे में आप क्या कहना चाहोगे , कोमेंट सेक्सन में जरुर बताना । यह कहना सही नहीं होगा कि पहले हिन्दुस्थान का नाम भारतवर्ष था और उसके भी पूर्व जम्बू द्वीप था। कहना यह चाहिए कि आज जिसका नाम हिन्दुस्तान है वह भारतवर्ष का एक टुकड़ा मात्र है। जिसे आर्यावर्त कहते हैं वह भी भारतवर्ष का एक हिस्साभर है और जिसे भारतवर्ष कहते हैं वह तो जम्बू द्वीप का एक हिस्सा है मात्र है। जम्बू द्वीप में पहले देव-असुर और फिर बहुत बाद में कुरुवंश और पुरुवंश की लड़ाई और विचारधाराओं के टकराव के चलते यह जम्बू द्वीप कई भागों में बंटता चला गया ।
Copyright Disclaimer under Section 107 of the copyright act 1976, allowance is made for fair use for purposes such as criticism, comment, news reporting, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non - profit, educational or personal use tips the balance in favour of fair use.
Photos with the videos remain the property of their respectfully owners. If any of photos is featured in my videos if want to remove or want credit than kindly contact me through mail which is given in my channel about section
Disclaimer : Our objective is not to promote any kind of damned story and superstitious. This video is for your entertainment only. The information given in the video is according to the information received on the Internet. We do not confirm its truth in any way. This video is for entertainment only and only. And our motive is not to hurt anyone's feelings.
#rahasyaduniyahindi #akhandbharat #ancientindia #uniteindia #2023 #bharat #hindudharam #hinduism
Видео खुपड़िया 😱 हिला देंगे अखंड भारत के यह रहस्य । अखंड भारत के रहस्य । अखंड भारत कैसा था ? Akhand bharat канала Rahasya Duniya Hindi
दोस्तों आज में आपको अखंड भारत ऐसे रहस्य बताने वाला जिन्हें आज तक आपने कहीं नहीं सुना होगा । जब आप इन रहस्यों को जानोगे तो सनातनी होने पर आपको गर्व महसूस होगा । अखंड भारत का नक्शा नयी संसद में भी लगा हुआ है । आपकी जानकारी के में थोड़ा सा आपको बता दूं की पहले यह पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी हुयी थी जो जम्बू, प्लक्ष, शाल्मली, कुश, क्रौंच, शाक एवं पुष्कर से जाने जाते थे । इनमें जंबू द्विप सभी के बीचों बीच स्थित था । मनुष्य के रहने के लिये जंबू द्वीप ही सबसे उत्तम माना जाता था । इसका नाम जम्बू जामुन के वृक्ष के आधार पर हुआ था । इस जम्बु द्वीप को भी नो खंडों में बांटा गया था । इलावृत्त, भद्रास्व, किंपुरुष, भारत, हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरू और हिरण्यमय । इसमें जिस भारत का वर्णन है , वहीं हमारा अखंड भारत है । भारत वर्ष के भी नौ खंड हैं इन्द्रद्वीप, कसेरु, ताम्रपर्ण, गभस्तिमान, नागद्वीप, सौम्य, गन्धर्व और वारुण तथा यह समुद्र से घिरा हुआ द्वीप उनमें नौवां है। अखण्ड भारत में आज के अफगानिस्थान, पाकिस्तान , तिब्बत, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका आते है केवल इतना ही नहीं कालान्तर में भारत के साम्राज्य में आज के मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैण्ड, दक्षिण वियतनाम, कम्बोडिया, इण्डोनेशिया , चीन आदि में सम्मिलित थे। बहुत सारे लोगों को अखंड भारत को लेकर एक कन्फ्यूजन है , और वह यह है की जब अखंड भारत बनेगा तो इसके सभी देश एक हो जायेंगें , तो बहुत सारी समस्या उत्पन्न होंगीं । तो उनको में बता दूं की पहले ऐसा नहीं था । अलग अलग महाजनपदों में अलग अलग राजाओं का राज हुआ करता था और सभी अपने राज्य घटाते बढ़ाते रहते थे । लेकिन इन सभी के ऊपर एक राजा हुआ करता था , जिसे चक्रवर्ती राजा कहा जाता था , सभी उसी के अंडर रहकर काम करते थे । यदि अखंड भारत बनता है , तो शायद ऐसा ही होगा । अलग - अलग देशों के प्रधानमंत्री अलग अलग होंगें । लेकिन इस सबके ऊपर एक राजा राज करेगा । सभी उसी के अंडर में काम करेंगें । महाभारत के भीष्म पर्व में वेदव्यास जी ने यह स्लोक
''सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन। परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः॥
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः। एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले॥ द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्।।- (वेदव्यास, भीष्म पर्व, महाभारत)
लगभग 5000 साल पहले लिखा गया था और इसका अर्थ है की हे कुरुनन्दन! सुदर्शन नामक यह द्वीप चक्र की भांति गोलाकार स्थित है, जैसे पुरुष दर्पण में अपना मुख देखता है, उसी प्रकार यह द्वीप चन्द्रमण्डल में दिखाई देता है। इसके दो अंशों में पिप्पल और दो अंशों में महान शश दिखाई देता है। दो अंशों में पिप्पल का अर्थ पीपल के दो पत्तों और दो अंशों में शश अर्थात खरगोश की आकृति के समान दिखाई देता है। आप कागज पर पीपल के दो पत्तों और दो खरगोश की आकृति बनाइए और फिर उसे उल्टा करके देखिए, आपको धरती का मानचित्र दिखाई देखा। यह श्लोक 5 हजार वर्ष पूर्व लिखा गया था। इसका मतलब लोगों ने चंद्रमा पर जाकर इस धरती को देखा होगा तभी वह बताने में सक्षम हुआ होगा कि ऊपर से समुद्र को छोड़कर धरती कहां-कहां नजर आती है और किस तरह की है । और इसी आधार पर का धरती का नक्शा तैयार किया गया और फिर उस पर अलग अलग द्वीपों का विभाजन किया गया । पहले संपूर्ण हिन्दू धर्म जम्बू द्वीप पर शासन करता था। क्योंकी बाकी के द्वीप रहने लायक नहीं थे । फिर हिन्दुओं का शासन घटकर भारतवर्ष तक सीमित हो गया। फिर कुरुओं और पुरुओं की लड़ाई के बाद आर्यावर्त नामक एक नए क्षेत्र का जन्म हुआ जिसमें आज के हिन्दुस्थान के कुछ हिस्से, संपूर्ण पाकिस्तान और संपूर्ण अफगानिस्तान का क्षेत्र था। लेकिन मध्यकाल में लगातार आक्रमण, धर्मांतरण और युद्ध के चलते अब घटते-घटते सिर्फ हिन्दुस्तान बचा है। और कुछ लोग चाहते हैं की इसके भी टुकड़े हो जायें । ऐसे लोगों के बारे में आप क्या कहना चाहोगे , कोमेंट सेक्सन में जरुर बताना । यह कहना सही नहीं होगा कि पहले हिन्दुस्थान का नाम भारतवर्ष था और उसके भी पूर्व जम्बू द्वीप था। कहना यह चाहिए कि आज जिसका नाम हिन्दुस्तान है वह भारतवर्ष का एक टुकड़ा मात्र है। जिसे आर्यावर्त कहते हैं वह भी भारतवर्ष का एक हिस्साभर है और जिसे भारतवर्ष कहते हैं वह तो जम्बू द्वीप का एक हिस्सा है मात्र है। जम्बू द्वीप में पहले देव-असुर और फिर बहुत बाद में कुरुवंश और पुरुवंश की लड़ाई और विचारधाराओं के टकराव के चलते यह जम्बू द्वीप कई भागों में बंटता चला गया ।
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10 июня 2023 г. 19:30:17
00:26:48
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