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Historycal thought दार्शनिक जॉर्ज ओरवेल george orwell इतिहास का विकृतिकरण

ऑरवेल का मुख्य निष्कर्ष: इतिहास का विकृतिकरण केवल अतीत के साथ छेड़छाड़ नहीं है, बल्कि यह वर्तमान में नागरिकों की सोचने-समझने की क्षमता और उनकी स्वतंत्रता पर किया गया सबसे बड़ा हमला है। जब किसी समाज से उसका वास्तविक इतिहास छीन लिया जाता है, तो उसे मानसिक रूप से गुलाम बनाना बेहद आसान हो जाता है।
इतिहास का विकृतिकरण (Distortion of History) एक ऐसा विषय है जिस पर जॉर्ज ऑरवेल ने बहुत ही गहरा और डरावना दार्शनिक चिंतन प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, "जो अतीत को नियंत्रित करता है, वह भविष्य को नियंत्रित करता है; और जो वर्तमान को नियंत्रित करता है, वह अतीत को नियंत्रित करता है।"
यह विचार उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'नाइनटीन एटी-फोर' (1984) का मूल आधार है। ऑरवेल ने यह स्थापित किया कि सत्तावादी ताकतें या सरकारें अपनी गद्दी को सुरक्षित रखने के लिए इतिहास को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती हैं।
ऑरवेल के अनुसार इतिहास को क्यों और कैसे बदला जाता है?
ऑरवेल ने इतिहास के विकृतिकरण के पीछे के मनोविज्ञान और तरीकों को बहुत बारीकी से समझाया है:
1. 'सत्य' की अवधारणा को नष्ट करना
ऑरवेल का मानना था कि तानाशाही सरकारें केवल यह नहीं चाहतीं कि लोग उनके झूठ पर विश्वास करें, बल्कि वे यह चाहती हैं कि लोग 'वस्तुनिष्ठ सत्य' (Objective Truth) जैसी किसी चीज के अस्तित्व को ही भूल जाएं। यदि कोई पुराना रिकॉर्ड ही नहीं बचेगा, तो सरकार जो कहेगी, वही एकमात्र सच मान लिया जाएगा।
2. इतिहास का निरंतर पुनर्लेखन (Continuous Rewriting)
उपन्यास '1984' में एक काल्पनिक विभाग है—'सत्य का मंत्रालय' (Ministry of Truth)। यहाँ नायक विंस्टन स्मिथ का काम ही यही है कि वह पुराने अखबारों, किताबों और तस्वीरों को रोज़ बदले।
यदि सरकार ने किसी देश के साथ अपनी संधि बदल ली, तो इतिहास के पुराने पन्नों से उस संधि का जिक्र ऐसे मिटा दिया जाता है जैसे वह कभी हुई ही नहीं थी।
व्यक्तियों को इतिहास से गायब कर दिया जाता है (जिन्हें ऑरवेल ने 'Unpersons' कहा)।
3. 'डबलथिंक' (Doublethink) और मानसिक नियंत्रण
इतिहास को विकृत करने के बाद जनता को उसे स्वीकार करवाने के लिए शासक 'डबलथिंक' का सहारा लेते हैं। इसका अर्थ है—एक ही समय में दो विरोधी विचारों को दिमाग में रखना और दोनों को सच मानना। लोग जानते हैं कि कल तक इतिहास कुछ और था, लेकिन आज सरकार के डर या प्रोपेगैंडा के कारण वे नए इतिहास को ही सच मान लेते हैं।
वर्तमान युग में ऑरवेल के विचारों की प्रासंगिकता
आज के डिजिटल और राजनीतिक परिदृश्य में इतिहास का विकृतिकरण तीन प्रमुख रूपों में देखा जा सकता है, जो ऑरवेल की चेतावनियों को सच साबित करते हैं:

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