Загрузка...

Janapav Kuti | Shree Parshuram Janm Bhoomi । Second high peak of Malwa plateau । Indore | India

Janapav Kuti | Shree Parshuram Janm Bhoomi । Second high peak of Malwa plateau । Indore | India
Hello guys here is my new video

https://youtu.be/GAc_qc57o7k

Hopefully, you guys like it, share it with your friends.

https://youtube.com/channel/UCrSFQ2hz1DN8BRT3zdcKZXQ

।।।। Subscribe my channel ।।।। and press "Bell icon" for stay tuned.

Shri Parshuram Janm Bhoomi
Badkua, Madhya Pradesh 453441

direction Google map link:-
https://maps.google.com/?cid=194656322232702106
भगवान परशुराम के जन्म के संबंध में प्रचलित कथाएं
- भगवान परशुराम के पिता भृगुवंशी ऋषि जमदग्रि और माता राजा प्रसेनजीत की पुत्री रेणुका थीं। ऋषि जमदग्रि बहुत तपस्वी और ओजस्वी थे। ऋषि जमदग्रि और रेणुका के पांच पुत्र रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्ववानस और परशुराम हुए। एक बार रेणुका स्नान के लिए नदी किनारे गईं। संयोग से वहीं पर राजा चित्ररथ भी स्नान करने आया था। राजा को देख रेणुका उसपर मोहित हो गईं। ऋषि ने योगबल से पत्नी के इस आचरण को जान लिया। उन्होंने अपने पुत्रों को मां का सिर काटने का आदेश दिया। किंतु परशुराम के अलावा सभी ने ऐसा करने से मना कर दिया। परशुराम ने पिता के आदेश पर मां का सिर काट दिया। क्रोधित पिता ने आज्ञा का पालन न करने पर अन्य पुत्रों को चेतना शून्य होने का श्राप दिया, जबकि परशुराम को वर मांगने को कहा। तब परशुराम ने तीन वरदान मांगे...
- पहला, माता को फिर से जीवन देने और माता को मृत्यु की पूरी घटना याद न रहने का वर मांगा।
- दूसरा, अपने चारों चेतना शून्य भाइयों की चेतना फिर से लौटाने का वरदान मांगा।
- तीसरा, वरदान स्वयं के लिए मांगा, जिसके अनुसार उनकी किसी भी शत्रु से या युद्ध में पराजय न हो और उनको लंबी आयु प्राप्त हो।
- पिता जमदग्रि अपने पुत्र परशुराम के ऐसे वरदानों को सुनकर गदगद हो गए और उनकी कामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया।

Видео Janapav Kuti | Shree Parshuram Janm Bhoomi । Second high peak of Malwa plateau । Indore | India канала Ja Ravi Ja
Яндекс.Метрика
Все заметки Новая заметка Страницу в заметки
Страницу в закладки Мои закладки
На информационно-развлекательном портале SALDA.WS применяются cookie-файлы. Нажимая кнопку Принять, вы подтверждаете свое согласие на их использование.
О CookiesНапомнить позжеПринять