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Baba kamlahiya temple,kamlah fort,Dharmpur,mandi,Himachal pradesh,india 🇮🇳#jaibabaki #harharmahadev
बाबा कमलाइया (Kamlahiya Baba) हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक पूजनीय संत हैं, जिनका मंदिर धरमपुर तहसील में कमलाहगढ़ किले के अंदर स्थित है।
मुख्य जानकारी:
पौराणिक मान्यताएं: पौराणिक कथाओं के अनुसार, बाबा कमलाइया गुरु गोरखनाथ के कई शिष्यों में से एक थे और मूल रूप से अमरनाथ धाम में रहते थे।
"कमला" नाम: अपने गहरे, मौन और ध्यानमग्न स्वभाव के कारण गुरु गोरखनाथ ने उन्हें "कमला" नाम दिया था।
मंदिर का स्थान: शिक्षा पूरी करने के बाद, बाबा ने ध्यान के लिए एक शांत और एकांत स्थान की तलाश में कांगड़ा की पहाड़ियों की ओर प्रस्थान किया और अंततः कमलाहगढ़ के पठार पर अपना आश्रम स्थापित किया।
धार्मिक महत्व: यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और दुखों को दूर करने के लिए यहां आते हैं। विशेष रूप से नए जोड़े आशीर्वाद के लिए बाबा के दर्शन करने आते हैं।
पहुँच: मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से लगभग 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
किला: जिस कमलाहगढ़ किले में मंदिर स्थित है, उसे 17वीं शताब्दी में मंडी साम्राज्य के राजा सूरज सेन द्वारा बनवाया गया था और यह कभी एक अभेद्य stronghold माना जाता था।
Видео Baba kamlahiya temple,kamlah fort,Dharmpur,mandi,Himachal pradesh,india 🇮🇳#jaibabaki #harharmahadev канала man from himalayan village
मुख्य जानकारी:
पौराणिक मान्यताएं: पौराणिक कथाओं के अनुसार, बाबा कमलाइया गुरु गोरखनाथ के कई शिष्यों में से एक थे और मूल रूप से अमरनाथ धाम में रहते थे।
"कमला" नाम: अपने गहरे, मौन और ध्यानमग्न स्वभाव के कारण गुरु गोरखनाथ ने उन्हें "कमला" नाम दिया था।
मंदिर का स्थान: शिक्षा पूरी करने के बाद, बाबा ने ध्यान के लिए एक शांत और एकांत स्थान की तलाश में कांगड़ा की पहाड़ियों की ओर प्रस्थान किया और अंततः कमलाहगढ़ के पठार पर अपना आश्रम स्थापित किया।
धार्मिक महत्व: यह मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र है। भक्तजन अपनी मनोकामनाएं पूरी करने और दुखों को दूर करने के लिए यहां आते हैं। विशेष रूप से नए जोड़े आशीर्वाद के लिए बाबा के दर्शन करने आते हैं।
पहुँच: मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से लगभग 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
किला: जिस कमलाहगढ़ किले में मंदिर स्थित है, उसे 17वीं शताब्दी में मंडी साम्राज्य के राजा सूरज सेन द्वारा बनवाया गया था और यह कभी एक अभेद्य stronghold माना जाता था।
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Информация о видео
9 ноября 2025 г. 15:43:02
00:18:50
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