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How to get Bail under UAPA,NDPS ACT?FIR UNDER Sec 17,38,40 of UAPA & Sec 8,21,25,29 of NDPS ACT।
Background Story / Facts of the Case
ये मामला है Syed Iftikhar Andrabi बनाम National Investigation Agency का।
साल 2019।
Article 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में तनावपूर्ण माहौल था।
सरकार ने कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को preventive detention में लिया।
इफ्तिखार अंद्राबी भी उन्हीं में से एक थे।
उन पर आरोप था कि वो जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ता थे और लोगों के बीच प्रभाव रखते थे।
पहले उन्हें Public Safety Act के तहत हिरासत में रखा गया।
लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने उनकी preventive detention को रद्द कर दिया।
यहीं से कहानी पलटी।
जून 2020 में पुलिस ने एक Creta कार पकड़ी।
कार से भारी मात्रा में नकदी और कथित heroin बरामद होने का दावा किया गया।
जांच आगे बढ़ी…
और NIA ने दावा किया कि यह सिर्फ ड्रग्स का मामला नहीं बल्कि “Narco Terror Funding Network” है।
आरोप लगाए गए कि ड्रग्स बेचकर जो पैसा कमाया जा रहा था, वही आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा था।
NIA ने कहा कि:
आरोपी के पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों से संबंध हैं
LeT और Hizbul Mujahideen से लिंक हैं
WhatsApp चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स मौजूद हैं
आरोपी ने पाकिस्तान यात्राएं की थीं
आरोपी terror funding chain का हिस्सा था
इसके बाद उन पर:
UAPA Sections 17, 38, 40
NDPS Act Sections 8, 21, 25, 29
और IPC 120B
लगाए गए।
लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ यहां था —
करीब 6 साल जेल में रहने के बावजूद ट्रायल पूरा होने का कोई संकेत नहीं था।
350 से ज्यादा गवाह अभी भी बाकी थे।
और यहीं से शुरू हुई सुप्रीम कोर्ट में बेल की सबसे अहम लड़ाई।
Lower Court Verdict
Special NIA Court ने बेल देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा:
आरोप बेहद गंभीर हैं
मामला national security से जुड़ा है
आरोपी पर terror funding के आरोप हैं
UAPA Section 43D(5) के तहत बेल पर कड़ी रोक है
कोर्ट का मानना था कि prima facie आरोप सही दिखाई देते हैं।
इसलिए आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता।
High Court Verdict
इसके बाद मामला जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट पहुंचा।
लेकिन हाई कोर्ट ने भी बेल खारिज कर दी।
हाई कोर्ट ने कहा:
Charges frame हो चुके हैं
ट्रायल चल रहा है
आरोप गंभीर हैं
इसलिए इस stage पर बेल नहीं दी जा सकती
यानी दोनों अदालतों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और UAPA की कठोरता को प्राथमिकता दी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को एक अलग नजरिए से देखा।
3. Recovery और Evidence पर सवाल
बचाव पक्ष ने कहा:
आरोपी से कोई cash बरामद नहीं हुआ
आरोपी के घर से recovery नहीं हुई
confession police के सामने लिया गया
जो Evidence Act Section 25 के तहत inadmissible हो सकता है
उन्होंने ये भी कहा कि:
“WhatsApp chats दिखाई नहीं गईं,
Call records में terrorist connection नहीं मिला।”
4. Parity Argument
दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही बेल मिल चुकी थी।
तो सवाल उठा —
अगर समान आरोप वाले दूसरे आरोपी बाहर हैं,
तो सिर्फ़ एक व्यक्ति को जेल में क्यों रखा जाए?
NIA का पक्ष
NIA ने जोरदार विरोध किया।
उन्होंने कहा:
आरोपी के पाकिस्तान कनेक्शन हैं
terror funding network का हिस्सा है
ड्रग्स से पैसा कमाकर आतंकवाद को सपोर्ट किया गया
मामला national security से जुड़ा है
NIA ने यह भी कहा कि:
Delay आरोपी की वजह से हुआ क्योंकि उसने कई applications दायर कीं।
और अगर कोर्ट चाहे तो ट्रायल को एक साल में खत्म करने का निर्देश दे सकती है।
Supreme Court Observations
अब आते हैं इस फैसले के सबसे ऐतिहासिक हिस्से पर।
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसी observations दीं जो भविष्य में हजारों UAPA मामलों को प्रभावित कर सकती हैं।
1. “Bail is the Rule”
कोर्ट ने साफ कहा:
“Bail is the Rule, Jail is the Exception”
सिर्फ़ एक कानूनी लाइन नहीं…
बल्कि संवैधानिक सिद्धांत है।
यानी liberty को default माना जाएगा।
2. UAPA भी संविधान से ऊपर नहीं
कोर्ट ने कहा:
हाँ, UAPA में bail restrictions हैं।
लेकिन constitutional courts की power खत्म नहीं होती।
अगर Article 21 का violation हो रहा है,
तो कोर्ट बेल दे सकती है।
कोर्ट ने K.A. Najeeb फैसले को दोहराते हुए कहा:
जब ट्रायल जल्दी खत्म होने की संभावना न हो,
तो Section 43D(5) की कठोरता “melt down” हो सकती है।
3. Long Incarceration = Constitutional Concern
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
किसी व्यक्ति को सालों तक undertrial रख देना
दरअसल pre-trial punishment बन जाता है।
और ये संविधान के खिलाफ है।
4. Serious Charges Alone पर्याप्त नहीं
कोर्ट ने कहा:
सिर्फ़ “गंभीर आरोप” बेल रोकने का आधार नहीं हो सकते।
अगर ट्रायल ही वर्षों तक लंबित रहे,
तो liberty को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
5. Trial Delay पर कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने रिकॉर्ड देखा और पाया:
Delay का बड़ा कारण prosecution था।
गवाह पेश नहीं किए गए।
चार्ज फ्रेम करने में भी देरी हुई।
इसलिए आरोपी को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
Final Verdict
आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बेल दे दी।
कोर्ट ने कहा:
लगभग 6 साल की हिरासत
350+ गवाह बाकी
ट्रायल जल्द खत्म होने की संभावना नहीं
कोई direct recovery नहीं
पहले interim bail misuse नहीं हुई
अन्य co-accused को बेल मिल चुकी
इन सब परिस्थितियों को देखते हुए continued incarceration उचित नहीं है।
और इसी के साथ सुप्रीम Court ने आरोपी को regular bail दे दी।
Case Reveal
इस ऐतिहासिक फैसले का नाम है:
Syed Iftikhar Andrabi vs National Investigation Agency
फैसला दिया गया: 18 मई 2026 को।
Bench:
Justice B. V. Nagarathna
Justice Ujjal Bhuyan
Видео How to get Bail under UAPA,NDPS ACT?FIR UNDER Sec 17,38,40 of UAPA & Sec 8,21,25,29 of NDPS ACT। канала LATEST JUDGEMENTS with Adv.Paresh
ये मामला है Syed Iftikhar Andrabi बनाम National Investigation Agency का।
साल 2019।
Article 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में तनावपूर्ण माहौल था।
सरकार ने कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को preventive detention में लिया।
इफ्तिखार अंद्राबी भी उन्हीं में से एक थे।
उन पर आरोप था कि वो जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ता थे और लोगों के बीच प्रभाव रखते थे।
पहले उन्हें Public Safety Act के तहत हिरासत में रखा गया।
लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने उनकी preventive detention को रद्द कर दिया।
यहीं से कहानी पलटी।
जून 2020 में पुलिस ने एक Creta कार पकड़ी।
कार से भारी मात्रा में नकदी और कथित heroin बरामद होने का दावा किया गया।
जांच आगे बढ़ी…
और NIA ने दावा किया कि यह सिर्फ ड्रग्स का मामला नहीं बल्कि “Narco Terror Funding Network” है।
आरोप लगाए गए कि ड्रग्स बेचकर जो पैसा कमाया जा रहा था, वही आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहा था।
NIA ने कहा कि:
आरोपी के पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों से संबंध हैं
LeT और Hizbul Mujahideen से लिंक हैं
WhatsApp चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स मौजूद हैं
आरोपी ने पाकिस्तान यात्राएं की थीं
आरोपी terror funding chain का हिस्सा था
इसके बाद उन पर:
UAPA Sections 17, 38, 40
NDPS Act Sections 8, 21, 25, 29
और IPC 120B
लगाए गए।
लेकिन कहानी में सबसे बड़ा मोड़ यहां था —
करीब 6 साल जेल में रहने के बावजूद ट्रायल पूरा होने का कोई संकेत नहीं था।
350 से ज्यादा गवाह अभी भी बाकी थे।
और यहीं से शुरू हुई सुप्रीम कोर्ट में बेल की सबसे अहम लड़ाई।
Lower Court Verdict
Special NIA Court ने बेल देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने कहा:
आरोप बेहद गंभीर हैं
मामला national security से जुड़ा है
आरोपी पर terror funding के आरोप हैं
UAPA Section 43D(5) के तहत बेल पर कड़ी रोक है
कोर्ट का मानना था कि prima facie आरोप सही दिखाई देते हैं।
इसलिए आरोपी को रिहा नहीं किया जा सकता।
High Court Verdict
इसके बाद मामला जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट पहुंचा।
लेकिन हाई कोर्ट ने भी बेल खारिज कर दी।
हाई कोर्ट ने कहा:
Charges frame हो चुके हैं
ट्रायल चल रहा है
आरोप गंभीर हैं
इसलिए इस stage पर बेल नहीं दी जा सकती
यानी दोनों अदालतों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और UAPA की कठोरता को प्राथमिकता दी।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को एक अलग नजरिए से देखा।
3. Recovery और Evidence पर सवाल
बचाव पक्ष ने कहा:
आरोपी से कोई cash बरामद नहीं हुआ
आरोपी के घर से recovery नहीं हुई
confession police के सामने लिया गया
जो Evidence Act Section 25 के तहत inadmissible हो सकता है
उन्होंने ये भी कहा कि:
“WhatsApp chats दिखाई नहीं गईं,
Call records में terrorist connection नहीं मिला।”
4. Parity Argument
दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही बेल मिल चुकी थी।
तो सवाल उठा —
अगर समान आरोप वाले दूसरे आरोपी बाहर हैं,
तो सिर्फ़ एक व्यक्ति को जेल में क्यों रखा जाए?
NIA का पक्ष
NIA ने जोरदार विरोध किया।
उन्होंने कहा:
आरोपी के पाकिस्तान कनेक्शन हैं
terror funding network का हिस्सा है
ड्रग्स से पैसा कमाकर आतंकवाद को सपोर्ट किया गया
मामला national security से जुड़ा है
NIA ने यह भी कहा कि:
Delay आरोपी की वजह से हुआ क्योंकि उसने कई applications दायर कीं।
और अगर कोर्ट चाहे तो ट्रायल को एक साल में खत्म करने का निर्देश दे सकती है।
Supreme Court Observations
अब आते हैं इस फैसले के सबसे ऐतिहासिक हिस्से पर।
सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसी observations दीं जो भविष्य में हजारों UAPA मामलों को प्रभावित कर सकती हैं।
1. “Bail is the Rule”
कोर्ट ने साफ कहा:
“Bail is the Rule, Jail is the Exception”
सिर्फ़ एक कानूनी लाइन नहीं…
बल्कि संवैधानिक सिद्धांत है।
यानी liberty को default माना जाएगा।
2. UAPA भी संविधान से ऊपर नहीं
कोर्ट ने कहा:
हाँ, UAPA में bail restrictions हैं।
लेकिन constitutional courts की power खत्म नहीं होती।
अगर Article 21 का violation हो रहा है,
तो कोर्ट बेल दे सकती है।
कोर्ट ने K.A. Najeeb फैसले को दोहराते हुए कहा:
जब ट्रायल जल्दी खत्म होने की संभावना न हो,
तो Section 43D(5) की कठोरता “melt down” हो सकती है।
3. Long Incarceration = Constitutional Concern
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
किसी व्यक्ति को सालों तक undertrial रख देना
दरअसल pre-trial punishment बन जाता है।
और ये संविधान के खिलाफ है।
4. Serious Charges Alone पर्याप्त नहीं
कोर्ट ने कहा:
सिर्फ़ “गंभीर आरोप” बेल रोकने का आधार नहीं हो सकते।
अगर ट्रायल ही वर्षों तक लंबित रहे,
तो liberty को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
5. Trial Delay पर कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने रिकॉर्ड देखा और पाया:
Delay का बड़ा कारण prosecution था।
गवाह पेश नहीं किए गए।
चार्ज फ्रेम करने में भी देरी हुई।
इसलिए आरोपी को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
Final Verdict
आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बेल दे दी।
कोर्ट ने कहा:
लगभग 6 साल की हिरासत
350+ गवाह बाकी
ट्रायल जल्द खत्म होने की संभावना नहीं
कोई direct recovery नहीं
पहले interim bail misuse नहीं हुई
अन्य co-accused को बेल मिल चुकी
इन सब परिस्थितियों को देखते हुए continued incarceration उचित नहीं है।
और इसी के साथ सुप्रीम Court ने आरोपी को regular bail दे दी।
Case Reveal
इस ऐतिहासिक फैसले का नाम है:
Syed Iftikhar Andrabi vs National Investigation Agency
फैसला दिया गया: 18 मई 2026 को।
Bench:
Justice B. V. Nagarathna
Justice Ujjal Bhuyan
Видео How to get Bail under UAPA,NDPS ACT?FIR UNDER Sec 17,38,40 of UAPA & Sec 8,21,25,29 of NDPS ACT। канала LATEST JUDGEMENTS with Adv.Paresh
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20 мая 2026 г. 21:31:02
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