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“शिव का जन्म: जब शून्य से प्रकट हुए महाकाल | सृष्टि के पहले योगी की अद्भुत कथा”

“जब शून्य से प्रकट हुए महादेव – शिव जन्म का दिव्य रहस्य”
जब न धरती थी, न आकाश…
न समय था, न दिशा…
चारों ओर केवल अंधकार और शून्य का साम्राज्य था।
तभी ब्रह्मांड में एक दिव्य कंपन उठा…
“ॐ” की पवित्र ध्वनि गूंजी…
और उस अनंत ऊर्जा से प्रकट हुए महादेव शिव।
शिव किसी माँ के गर्भ से जन्मे नहीं थे।
वे स्वयंभू, अर्थात स्वयं प्रकट हुए —
न उनका कोई आरंभ है, न अंत।
कहते हैं, हिमालय की कैलाश चोटी पर
एक अनंत अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ,
जिसका न आदि दिखा, न अंत।
वहीं से प्रकट हुए जटाधारी, भस्मधारी, त्रिनेत्रधारी आदियोगी शिव।
देवताओं ने उन्हें सृष्टि का संतुलनकर्ता माना।
वे संहारक भी हैं, रक्षक भी…
ध्यान के स्वामी भी हैं, और तांडव के देव भी।
शिव हमें सिखाते हैं —
अहंकार का नाश, सत्य का मार्ग, और आत्मज्ञान की शक्ति।
महादेव का जन्म नहीं, प्राकट्य हुआ था…
क्योंकि शिव समय से भी परे हैं।
🔱 हर हर महादेव 🔱

Видео “शिव का जन्म: जब शून्य से प्रकट हुए महाकाल | सृष्टि के पहले योगी की अद्भुत कथा” канала FACT OF BHARAT
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