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आई माता मंदिर बिलाड़ा जोधपुर / aai Mata / आई माता मंदिर /Bilara jodhpur / बिलाड़ा का आई माता मंदिर

बिलाड़ा (जोधपुर). आई माता के मंदिर में 600 साल पहले प्रज्जवलित ज्योत आज भी अखंड है। यह भी किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इस ज्योत के ऊपर रखे पात्र में ज्योत की लौ से काजल या कालापन नहीं बल्कि केसर निकलता है।

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राजस्थान के जोधपुर जिले का बिलाड़ा गांव श्री आई माता जी की पवित्र नगरी है। बिलाड़ा जोधपुर से 80 किलोमीटर दूर जयपुर रोड पर स्थित है। बिलाड़ा श्री आई माता जी की पवित्र नगरी के रूप में संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध है। मां आई माताजी का विश्व विख्यात मंदिर। तीर्थ धाम माना जाता है। माता के इस मंदिर में दीपक में से काजल की जगह केसर निकलता है,जी हां, दीपक से निकलने वाले इस केसर को भक्त अपनी आंखों में लगाते हैं। यह मंदिर काफी प्राचीन है भक्तों के अनुसार यहां माता आई थी इसलिए इस मंदिर को आईजी माता के नाम से जाना जाता है।
मां दुर्गा का अवतार श्री आईमाता गुजरात के अम्बापुर में अवरीत हुई थी। अम्बापुर में कई चमत्कारों के पश्चात श्री आईमाता जी भ्रमण करते हुए बिलाड़ा आईं। मंदिर को केशर ज्योति मंदिर के नाम से देश और दुनिया में जाना जाता हैं। यहां पर उन्होंने भक्तों को 11 गुण व सदैव सन्मार्ग पर चलने के सदुपदेश दिए। तथा ये 11 गुण आज भी लोग जानते है तथा उनके दिए आशीर्वाद को समझ कर उसका पालन भी करते हैं। इन उपदेशों के बाद एक दिन उन्होंने हज़ारों भक्तों के समक्ष स्वयं को अखंड ज्योति में विलीन कर दिया। इसी अखंड ज्योति से केसर प्रकट होता है, जो आज भी मंदिर में माताजी की उपस्थिति का साक्षात् प्रमाण है।
मान्यताओं के अनुसार इस अखण्ड ज्योति के दर्शन से ही सभी बाधा दूर हो जाती हैं। करीब 1556 ईसवी में बने इस मंदिर में एक गद्दी है, जिसकी पूजा भक्त सदियों से करते चले आ रहे हैं। यहां माता की मात्र तस्वीर है जो गद्दी पर विराजित हैं। आई जी माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते है। लोगों का ऐसा मानना है कि ज्योत से टपकने वाली केसर लगाने से आंखों के रोग के साथ अन्य रोग भी ख़त्म हो जाते है। खास कर यहां नवरात्री में भक्तों का तांता लगा रहता है।
संगमरमर से बने मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। मंदिर में पहुंचकर मन में बहुत ही सुकून मिलता है और सवर्ग का अनुभव होता है। और यहां सुबह चार बजे मंगला आरती और सायं सात बजे सांझ आरती के समय मंदिर का माहौल देखने लायक होता है।
मान्यता है की दीवान वंशज के राजा माधव अचानक कहीं गायब हो गए थे और माता उन्हें ढूंढने निकली। राजा माधव माता को इसी गांव में मिले थे। तभी से मां इस मंदिर में विराजित है इस मंदिर के अंदर जलने वाला अखंड दीपक करीब 550 वर्षों से जल रहा है। लोगों का मानना है कि इस इस अखंड दीपक से निकले वाली लौ से निकलने वाला पदार्थ केसर है। भक्त यहां नीमच और मंदसौर से बस के द्वारा मनासा पहुंच सकते है। आई जी माता के दर्शन करने आसपास के शहरों और राज्यों से भक्तगण आते है। यहां हजारों लोग पूजा करने और मन्नत मांगने आते है। लोगों की मन्नत पूरी होने पर वे आई जी माता को चढ़ावा चढ़ाते है । मंदिर के पुजारियों के अनुसार आज से 550 साल पहले आई जी माता ने स्वयं इस ज्योत को जलाया था। तभी से यह देशी घी की अखंड ज्योत जलती आ रही है।

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