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PL11-01 सम्यक्त्व के प्रकार में भिन्नता

'प्रथमोपशम सम्यक्त्व से पूर्व होनेवाली पंचलब्धि' पुस्तक के आधार से
पंचलब्धि शिबिर २६/०१/२०१८ से ३०/०१/२०१८

आचार्य श्री नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती ने गोम्मटसार क्षपणासार ग्रंथ की रचना की है। उसीके आधार से पंडित टोडरमलजी ने ढूंढ़ारी भाषा में सम्यग्ज्ञानचन्द्रिका भाषाटीका लिखी है। उसीका हिंदी अनुवाद डॉ. श्रीमती उज्ज्वला शहा ने किया है जिसके आधार से उन्होंने पंचलब्धि पुस्तक लिखी है।

करणानुयोग के स्वाध्याय की प्रेरणा के लिये इस शिबिर में से कुछ विषय की झलकियां प्रस्तुत है।
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