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गर्भाधन गीत | अब न जाइब फूलवा लोढ़े | U.P | GAZIPUR | पारंपरिक भोजपुरी सोहर गीत | LOKSAMPADA

गर्भाधन गीत | अब न जाइब फूलवा लोढ़े | U.P | GAZIPUR | पारंपरिक भोजपुरी सोहर गीत | LOKSAMPADA

यह एक सोहर है, जो संतान जन्म के समय गाया जाता है। गीत में 'फूल लोढ़ने' (फूल तोड़ने) जाने से मना करने और घर के सदस्यों से अपनी इच्छा पूरी करने की जिद का वर्णन है।इसमें एक गर्भवती स्त्री की कोमलता और उसके सम्मान को दर्शाया गया है। वह कहती है कि अब वह खुद फूल तोड़ने नहीं जाएगी, बल्कि उसके ससुराल वाले (सासु, ननद और देवर) उसके लिए फूल मँगाएंगे। यह आने वाली संतान के प्रति पूरे परिवार के उत्साह को भी दर्शाता है।भोजपुरी लोक परंपरा में सोहर गीतों के माध्यम से परिवार के आपसी प्रेम और जच्चा (माँ) के प्रति सत्कार को व्यक्त किया जाता है। यहाँ 'देवर' को राजा कहकर संबोधित करना देवर-भाभी के मधुर रिश्ते और आने वाले बच्चे के प्रति चाचा के स्नेह को दिखाता है।

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गीत के बोल (Lyrics in Hindi)
"अब न जाइब फूलवा लोढ़े, अब न जाइब,
ए ललना तौने फूलवा देखि ललचाइ, अब न जाइब।

सासु से माँगी ला सनेहिया, सासु से माँगी ला,
ए सासु! हमके फूलवा मँगाइ दय, अब न जाइब।

जेकर देवर होइहें राजा, जेकर देवर होइहें,
ए धनि! ऊहे तौ फूलवा मँगाई हैं, अब न जाइब।

ननदो से माँगी ला सनेहिया, ननदो से माँगी ला,
ए ननद! हमके फूलवा मँगाइ दय, अब न जाइब।"

Видео गर्भाधन गीत | अब न जाइब फूलवा लोढ़े | U.P | GAZIPUR | पारंपरिक भोजपुरी सोहर गीत | LOKSAMPADA канала Prasar Bharati Lok Sampada
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