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महात्मा गांधी | नरेगा | के प्रतिमानात्मक | बदलाव | और | रोजगार गारंटी | योजनाएं तैयार करना | E-2

महात्मा गांधी नरेगा के प्रतिमानात्मक बदलाव

1.महात्मा गांधी नरेगा ने मानव इतिहास में सबसे विशाल रोजगार कार्यक्रम को सफल बनाया है और यह अपने व्यापकता , संरचना और उद्देश्य में किसी अन्य मजदूर मजदूरी रोजगार कार्यक्रम से अलग है | इसकी बॉटम-अप, जन केंद्रित मांग आधारित, स्व-चयनित, अधिकार आधारित डिजाइन विशिष्ट और अद्वितीय है|
2. महात्मा गांधी नरेगा में मजदूरी रोजगार को कानूनी गारंटी दी गई है|
3. यह मांग आधारित कार्यक्रम है जहां कार्य का प्रावधान मजदूरी मांगने वाले व्यक्तियों द्वारा की गई कार्य की मांग से प्रेरित होता है|
4. मांग किए जाने पर कार्य उपलब्ध ना कराए जाने तथा किए गए कार्य के लिए मजदूरी के भुगतान में विलंब होने की स्थिति में भत्ता और मुआवजा दोनों का कानूनी प्रावधान है|
5. महात्मा गांधी नरेगा लाभार्थियों के चयन की स्व-लक्षित व्यवस्था के जरिए लक्ष्यईकरण की समस्याओं को दूर करता है अर्थात बड़ी संख्या में अत्यंत निर्धन और सीमांत व्यक्तियों को इस योजना के अंतर्गत रोजगार मिलता है |
6. अधिनियम राज्यों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि कार्यक्रम की शत-प्रतिशत अकुशल श्रम लागत और 75% सामग्री लागत का वाहन केंद्र द्वारा किया जाता है|
7. पूर्ववर्ती आवंटन आधारित मजदूरी रोजगार कार्यक्रमों से परे मनरेगा मांग आधारित है और प्रत्येक राज्य में रोजगार की मांग के आधार पर केंद्र से राज्यों को संसाधन का अंतरण किया जाता है |इससे राज्यों को निर्धनों की रोजगार संबंधी जरूरतों को पूरा करने में अधिनियम का विस्तार करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन मिलता है|
8. समय पर कार्य उपलब्ध कराने में असफल रहने पर सहवर्ती वित्तीय निरुत्साहन का भी प्रावधान है क्योंकि तब राज्यों को बेरोजगारी भत्ते की लागत का वहन करना पड़ता है|
9.लागत के हिसाब से कम से कम 50% कार्यों का कार्यान्वयन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाएगा| ग्राम पंचायतों को वित्तीय संसाधनों के प्रत्यायोजन का यह क्रम अभूतपूर्व है|
10. शुरू किए जाने वाले कार्यों के स्वरूप और चयन से संबंधित योजनाओं और फैसलों ,प्रत्येक कार्य को शुरू किए जाने वाले क्रम, स्थान का चयन आदि पर निर्णय ग्राम सभा की खुली बैठकों में किया जाएगा तथा ग्राम पंचायत इसकी अभिपुष्टि करेगी| प्रशासनिक अनुमति दिए जाने से पहले ग्रामसभा मध्यवर्ती पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर
निविष्ट किए गए कार्यों को अनुमोदित करेगी |और उनका क्रम निर्धारित करेगी| ग्रामसभा उन्हें स्वीकृत, संशोधित या अस्वीकृत कर सकती है|
11. उच्चतम प्राधिकरण इन निर्णयों को रद्द नहीं कर सकता है|
वे केवल अधिनियम और इसके परिचालन दिशा निर्देशों के प्रावधानों के अनुपालन की सीमा सुनिश्चित कर सकते हैं|
12. इस बॉटम-अप, जन केंद्रित मांग आधारित संरचना का यह आशय भी है कि मनरेगा की असफलता के लिए जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा मजदूरी मांगने वालों, ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों के पास है|
13. मनरेगा समेकित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका सृजन परिप्रेक्ष्य में पूर्व राहत कार्यक्रमों से भी मुक्ति दिलाता है|
14. सामाजिक लेखा परीक्षा एक नई विशेषता है जो मनरेगा का एक अभिन्न हिस्सा है |संभवतः यह विशेष रूप से नए स्टेकहोल्डरो के लिए निष्पादन की एक अभूतपूर्व जवाबदेही तय करता है|
15. मनरेगा के परिणामों पर केंद्रीय रोजगार गारंटी परिषद (सीईजीसी) द्वारा तैयार की गई वार्षिक रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत की जाती है |इसी प्रकार राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा तैयार की गई वार्षिक रिपोर्टें राज्य सरकारों द्वारा राज्य विधानमंडलों में प्रस्तुत करनी होती है ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों को निरीक्षण करने में मदद मिल सके|
कार्यक्रम के मूलतः नए अध्ययनों को प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अभिनव दृष्टिकोणों की जरूरत होती है| इससे यह सुनिश्चित होगा कि मनरेगा के कार्यान्वयन के बिल्कुल अंतिम स्तर पर वास्तविक रुप से मनरेगा के नए तत्वों को साकार किया जा रहा है| इस अनुपालन को सुगम बनाने के लिए ही परिचालन दिशानिर्देश जारी किए गए हैं|

रोजगार गारंटी योजना तैयार करना

राज्य सरकार द्वारा बनाई गई योजना में अनुसूची 1 में विनिर्दिष्ट न्यूनतम विशेषताओं का प्रावधान होगा| अधिनियम के तहत बनाई गई किसी भी राज्य-योजना के तहत तैनात किए गए व्यक्तियों को अधिनियम की अनुसूची 2 में सूचीबद्ध न्यूनतम सुविधाएं मिलेगी|
इसके अलावा योजनाएं इस दिशानिर्देशों में उल्लिखित परिचालन मानदंडों के अनुसार चलेगी| इस प्रकार बनाई गई योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एम जी एन आर ई जी एस) कहलाती है| राष्ट्र स्तरीय नाम और लोगो अनिवार्य है सभी आईईसी क्रियाकलापों और सामग्रियों के लिए इसी लोगों का इस्तेमाल किया जाएगा|

अधिनियम में किए गए निर्धारण के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच लागत-वाहन आधार पर केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में मनरेगा को क्रियान्वित किया जाता है|

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