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कोहलबर्ग का सिद्धांत | पूर्व लौकिक अवस्था | पूर्व परंपरागत अवस्था | TRICK #education #competition

कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत (Kohlberg’s Theory of Moral Development)

लॉरेंस कोहलबर्ग ने बताया कि व्यक्ति की नैतिक सोच उम्र और अनुभव के साथ क्रमबद्ध रूप से विकसित होती है। यह विकास तीन स्तरों और छह चरणों में होता है—

1️⃣ पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-Conventional Level)
इस स्तर पर सही-गलत का निर्णय दंड या लाभ के आधार पर होता है।
चरण 1: दंड से बचना
चरण 2: पुरस्कार/स्वार्थ आधारित निर्णय

2️⃣ परंपरागत स्तर (Conventional Level)
यहाँ व्यक्ति समाज, नियम और दूसरों की अपेक्षाओं को महत्व देता है।
चरण 3: अच्छा लड़का/लड़की बनने की इच्छा
चरण 4: कानून और सामाजिक व्यवस्था का पालन

3️⃣ उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-Conventional Level)
इस स्तर पर व्यक्ति सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय करता है।
चरण 5: सामाजिक अनुबंध और अधिकार
चरण 6: आत्मनिर्धारित नैतिक सिद्धांत

👉 शिक्षा में महत्व: यह सिद्धांत छात्रों में नैतिक विवेक, निर्णय-क्षमता और मूल्यों के विकास को समझने में सहायक है।
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