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चींटियों से प्रेरित CrazyFlie ड्रोन | डेल्फ़्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी

डेल्फ़्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने बहुत छोटे-छोटे ड्रोन बनाए हैं। ये ड्रोन चींटियों से प्रेरित हैं और रास्ता ढूँढने के लिए दो चीज़ों का इस्तेमाल करते हैं – कदम गिनना (ओडोमेट्री) और आस-पास की तस्वीरें लेना (स्नैपशॉट्स)।

आपको हैंसल और ग्रेटल की कहानी याद है? उसमें हैंसल रास्ते में पत्थर फेंकता जाता था ताकि घर लौटते समय रास्ता न भूले। चींटियाँ भी कुछ ऐसा ही करती हैं। वे पत्थर नहीं फेंकतीं, बल्कि चलते-चलते अपने आस-पास की तस्वीरें दिमाग़ में उतार लेती हैं। इसके साथ ही, वे अपने कदम गिनती रहती हैं। जब वे घर लौटती हैं तो एक तस्वीर से दूसरी तस्वीर तक पहुँचती हैं और अपने रास्ते को ठीक करती जाती हैं ताकि भटक न जाएँ।

वैसे ही, ये छोटे-से TU-Delft ड्रोन भी काम करते हैं। इनका वज़न सिर्फ़ 56 ग्राम है। ये अपने आप उड़ सकते हैं और इन्हें बहुत ज़्यादा बिजली या कंप्यूटर की ताकत की ज़रूरत नहीं होती। ये 100 मीटर उड़ने के लिए बस 1.16 किलोबाइट डेटा इस्तेमाल करते हैं।

ऐसे छोटे ड्रोन गोदामों में सामान गिनने, गैस का रिसाव ढूँढने या ग्रीनहाउस में फसलों पर नज़र रखने में काम आ सकते हैं।

Reference: https://www.tudelft.nl/en/2024/lr/ant-insights-lead-to-robot-navigation-breakthrough

Видео चींटियों से प्रेरित CrazyFlie ड्रोन | डेल्फ़्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी канала Vigyan Vyanjan
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