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#birdtrend

भगवद गीता में भगवान कृष्ण ने भाग्य के बारे में कहा है:

"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥"

अर्थ: "तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल की इच्छा मत करो। कर्म के फल का हेतु मत बनो और न ही अकर्म में आसक्त होओ।"

इसका अर्थ है कि हमें अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, न कि उसके फल पर। भाग्य के बारे में चिंता करने के बजाय, हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

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