Загрузка...

@डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर जी ने 46 स्वतंत्र सेनानियों की जान कैसे बचाई ।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी साल उन्नीस सौ में गोधरा गोधरा से वकालत शुरू की थी बाबासाहेब ने कई केश जीते थे जिसे जीतना और वकीलों के लिए संभव नहीं था। एक दिन बाबासाहेब 46 स्वतंत्र सेनानियों के केस लड़ रहे थेजिन्हें अंग्रेज फांसी की सजा सुनाने वाले थे । 1 दिन बाबासाहेब कोर्ट में बहस कर रहे थे और अचानक से बीच में ही एक आदमी आंखें उनके हाथ में एक कागज देकर चला जाता है। बाबासाहेब ने उस चिट्ठी को पढ़कर अपनी जेब में रख लिया और उस पर ध्यान नहीं दिया। अपना 46 स्वतंत्र सेनानियों की फांसी से बचाने के लिए अपना बहस जारी रखा। 2 घंटे तक बहस जारी रहा और अंत तक उन्होंने अपनी बहस को जारी रखा और केस जीत गए। केस जीत जाने के बाद जज ने बाबासाहेब से पूछा उस चिट्ठी में क्या लिखा है। जवाब में बाबासाहेब ने जज को बताया कि उस चिट्ठी में मेरी पत्नी की मृत्यु की खबर लिखी थी यह जवाब सुनते ही जज आश्चर्यचकित हो कर पूछा चिट्ठी मिलते ही तुम उनके पास क्यों नहीं गए ? तब जवाब में बाबा साहेब ने कहा मेरी पत्नी मर चुकी है। मैं चाह कर भी उसे वापस नहीं ला सकता . लेकिन मैं वहां चला जाता तो इन 46 बे कसूर स्वतंत्र सेनानियों की जान जरूर चली जाती । और अंत में स्वतंत्र सेनानी बेकसूर साबित हुई जो सिर्फ बाबासाहेब से ही संभव हो सकता था। तो दोस्तों ऐसे हां थे हमारे बाबा साहेब।

Видео @डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर जी ने 46 स्वतंत्र सेनानियों की जान कैसे बचाई । канала surksha path.
Яндекс.Метрика
Все заметки Новая заметка Страницу в заметки
Страницу в закладки Мои закладки
На информационно-развлекательном портале SALDA.WS применяются cookie-файлы. Нажимая кнопку Принять, вы подтверждаете свое согласие на их использование.
О CookiesНапомнить позжеПринять